
www.daylifenews.in
जयपुर। राजस्थान में हमारी कांग्रेस सरकार ने 2013 में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए 500 रुपये मासिक सामाजिक सुरक्षा पेंशन शुरू की थी। सत्ता परिवर्तन के बाद आई भाजपा सरकार ने पांच साल तक इसमें एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की। 2018 में हमारी सरकार पुनः सत्ता में आई तो इसे बढ़ाकर 750 रुपये प्रतिमाह किया गया, और 2023 में 1,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इतना ही नहीं, भविष्य में कोई भी सरकार इस राशि को स्थिर न रख सके, इसके लिए हमने प्रतिवर्ष 15 प्रतिशत बढ़ोतरी का कानूनी प्रावधान बना दिया। यह पेंशन आज प्रदेश के लाखों जरूरतमंद परिवारों का सहारा बनी हुई है।
दूसरी ओर, केंद्र में कांग्रेस सरकारों ने बुजुर्गों, दिव्यांगों और विधवाओं को सामाजिक सुरक्षा पेंशन देना शुरू किया था, जिसे 2013 तक बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिमाह किया गया। लेकिन उसके बाद के पूरे 12 वर्षों में मोदी सरकार ने इस केंद्रीय पेंशन राशि में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं की, जबकि इस दौरान महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है। मोदी सरकार आने के बाद से लाभार्थियों की संख्या भी नहीं बढ़ाई गई। संसद की स्थायी समिति ने बार-बार इस राशि को अपर्याप्त बताते हुए बढ़ोतरी की सिफारिश की, फिर भी मोदी सरकार टस से मस नहीं हुई। यह बात राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने एक्स हैंडिल पर लिखी।
उन्होंने आगे लिखा जबकि यही मोदी सरकार अमीर उद्योगपतियों के लाखों करोड़ रुपये एक झटके में माफ कर देती है, लेकिन गरीब और जरूरतमंद बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगों को एक रुपया तक बढ़ाकर देने को तैयार नहीं है। यही कांग्रेस और भाजपा की सोच का असली फर्क है, कांग्रेस जनता का पैसा जनता को वापस लौटाती है, जबकि भाजपा जनता का पैसा उद्योगपतियों की जेब में डालती है।
पूर्व सीएम ने कहा राज्य सरकारों के लिए पेंशन देना एक आर्थिक चुनौती बन जाता है। केन्द्र सरकार के पास अधिक संसाधन हैं। केन्द्र सरकार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर देशहित में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को इस महंगाई के दौर में एक गरिमापूर्ण जीवनयापन के लिए अविलंब पेंशन राशि बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति महीने करनी चाहिए और इसके लाभार्थियों की संख्या बढ़ानी चाहिए। इस राशि में राज्य और केन्द्र सरकार 50-50% हिस्सा वहन करें।
https://x.com/ashokgehlot51/status/2095069921407594700