
15 अगस्त स्वाधीनता दिवस का नवगीत
लेखक : वेदव्यास
लेखक साहित्य मनीषी एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं
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मुक्ति के संग्राम का पर्याय मेरा देश।
चेतना के रंग का अध्याय मेरा देश।।
शब्द जिसके तैरते हैं अग्निधारा में।
अर्थ लेता है जहां इतिहास का सपना
विषबुझी उन्माद की पछुआ हवाओं पर
सूर्य किरणों से लिखा है नाम फिर अपना
लोक सत्ता के लिए प्रतिबद्ध मेरा देश।
प्रेरणा के पृष्ठ से सम्बद्ध मेरा देश।।

धर्म का जिसने नया परिवेश खोजा है
तोड़ डाले हैं समय की क्रूरता के पंख
विश्व के भूगोल की रचना बदलने में
और उजले हो गये स्वाधीनता के शंख
ज्योति रेखा को समर्पित आज मेरा देश।
व्यक्ति की अभिव्यक्ति का संवाद मेरा देश।।
युद्ध को जो और अब जीने नहीं देगा
दे रहा जो फिर चुनौती झूठे के बल को
यूं नहीं उड़ पायेंगे आतंक के बादल
मान्यता देगा नहीं जो ध्वंस के कल को
सत्य की आवाज का अधिकार मेरा देश।
भावना के ज्वार का संसार मेरा देश।।