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मुंबई। नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (एनबीएफसी) भारत में औपचारिक कर्ज तक पहुंचने का बड़ा जरिया बन गई हैं। जून 2026 तक न्यू-टू-क्रेडिट (एनटीसी) उपभोक्ताओं के लोन ओरिजिनेशन में इनकी हिस्सेदारी करीब आधी (47%) रही। फाइनेंस इंडस्ट्री डेवलपमेंट काउंसिल (एफआईडीसी) और ट्रांसयूनियन सिबिल ने मिलकर “भारत निर्माण: एनबीएफसी फॉर्मिंग द फाउंडेशन ऑफ क्रेडिट डिस्प)र्सन ’’ नाम की रिपोर्ट तैयार की है। इसके मुताबिक, आज क्रेडिट के लिए पात्र 36% उपभोक्ता किसी एनबीएफसी के जरिए कर्ज ले चुके हैं, जबकि सभी क्रेडिट-एक्टिव उपभोक्ताओं में से 46% के पास एनबीएफसी का लोन है। पिछले एक दशक में एनबीएफसी का लगातार विस्तार हुआ है। इस दौरान इनका क्रेडिट-एक्टिव उपभोक्ता आधार करीब सात गुना हो गया और रिटेल लोन ओरिजिनेशन में इनकी हिस्सेदारी 33% से बढ़कर 43% हो गई। ट्रांसयूनियन सिबिल के एमडी और सीईओ भावेश जैन ने कहा, “पिछले एक दशक में एनबीएफसी सेक्टर ने लंबा सफर तय किया है। जैसे-जैसे ग्राहकों की क्रेडिट जरूरतें बदलेंगी, अगला दौर उनके साथ गहरे और लंबे रिश्ते बनाने का होगा।” एफआईडीसी के सीईओ रमन अग्रवाल ने कहा, एक दशक पहले के मुकाबले आज एनबीएफसी सेक्टर भारत के क्रेडिट सिस्टम में कहीं ज्यादा गहराई से जुड़ा हुआ है।