
मनोहरपुर में बंद पड़े सीसीटीवी कैमरों पर उठे सवाल
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। मनोहरपुर कस्बे में रविवार को उस समय हड़कंप मच गया जब कस्बे में कुछ लोग खुलेआम तलवारें बेचते हुए दिखाई दिए। स्थानीय लोगों ने इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल पुलिस प्रशासन को सूचना दी। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के निर्देश पर पुलिस टीम सक्रिय हुई और
स्बे के विभिन्न प्रमुख मार्गों पर तलाश अभियान चलाया गया।
पुलिस द्वारा की गई खोजबीन के दौरान चार लोगों को तलवारें बेचते हुए पाया गया, जिन्हें थाने लाया गया। थाना पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर सामने आया कि उनके पास आर्टिफिशियल धातु से निर्मित तलवारें थीं। थाना एएसआई रामू सिंह ने बताया कि संबंधित लोगों को खुले में तलवार बेचने से रोका गया तथा उन्हें जयपुर की ओर रवाना कर दिया गया।
अपराध रोकने में सबसे बड़ी बाधा बने बंद सीसीटीवी कैमरे
घटना के बाद कस्बे में एक बार फिर नगर पालिका द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अपराधों पर अंकुश लगाने और संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए नगर पालिका द्वारा करीब एक करोड़ रुपये की लागत से सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे, लेकिन अधिकांश कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं।
नागरिकों का आरोप है कि कैमरे लगाए जाने के बाद शुरुआती करीब दो माह तक ही चालू रहे, उसके बाद से अधिकांश कैमरे बंद हो गए। ऐसे में कस्बे में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों और अपराधों की निगरानी प्रभावित हो रही है।
ऐसे में कस्बे में होने वाली घटनाओं का पुलिस प्रशासन को कोई सहयोग नहीं मिल प था है।इससे पूर्व भी कस्बे में कई घटना घटित हो चुकी है जो कि सीसीटीवी कैमरे बंद होने से परेशानी का सामना करना पड़ा था।
एक करोड़ का प्रोजेक्ट, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बेअसर
लोगों ने सवाल उठाया है कि जब नगर पालिका ने करोड़ों रुपये खर्च कर कैमरे लगाए थे तो उनकी नियमित मॉनिटरिंग और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी? कैमरों के लिए जारी टेंडर की राशि का कितना भुगतान हुआ, कितना बकाया है और कैमरे बंद होने के बावजूद अब तक उन्हें चालू क्यों नहीं कराया गया?
स्थानीय नागरिकों के अनुसार हंसराज तिराहा और बिशनगढ़ मोड़ सहित कई स्थानों पर लगे कैमरे टूटकर नीचे गिर गए थे, जिन्हें बाद में नगर पालिका द्वारा हटवा लिया गया। लेकिन उनकी जगह नए कैमरे नहीं लगाए गए और न ही बंद कैमरों को दुरुस्त कराया गया।
जनता ने मांगा जवाब
कस्बेवासियों का कहना है कि यदि सीसीटीवी कैमरे सुचारु रूप से चालू होते तो संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता और पुलिस को भी अपराधों की रोकथाम में तकनीकी सहायता मिलती। लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से कैमरों की वर्तमान स्थिति, खर्च की गई राशि और रखरखाव व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है।
रविवार की घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर सुरक्षा व्यवस्था बनाई गई थी तो वह आज जनता और पुलिस, दोनों के लिए निष्प्रभावी क्यों बनी हुई है। अब लोगों की निगाहें नगर पालिका प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और बंद पड़े कैमरों को कब तक चालू कराया जाता है।