
चाँद दिखने के साथ हिजरी सन 1448 शुरू
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। ताजिया सिर्फ एक यादगार और अदब का प्रतीक है। इसे 10 मुहर्रम के दिन जुलूस में ले जाकर फिर नदी/तालाब में विसर्जित कर दिया जाता है। इसका मकसद शहीद-ए-कर्बला को याद करना और सब्र-शुक्र का पैगाम देना है।
ताजिया मुहर्रम में बनाई जाने वाली एक प्रतिकात्मक संरचना है, जो कर्बला के शहीदों की याद में बनाई जाती है। ताजिया को मोटे तौर पर 3 मुख्य हिस्सों में बनाया जाता है:
बेस/चबूतरा – सबसे नीचे का हिस्सा। इसे मजबूत लकड़ी या प्लाईवुड से बनाया जाता है ताकि पूरा ताजिया टिका रहे।
मंजिलें/फ्लोर – ये बीच का हिस्सा है। ताजिया आमतौर पर 1, 3, 5, 7 या 9 मंजिल का होता है। हर मंजिल छोटी होती जाती है।
गुम्बद/कलश – सबसे ऊपर का हिस्सा। इसे चांद, सितारा या मीनार की शक्ल दी जाती है।
ताजिया बनाने में क्या-क्या लगता है
स्ट्रक्चर के लिए:
लकड़ी, बांस, प्लाईवुड- फ्रेम बनाने के लिए, गत्ता, थर्मोकोल – डिजाइन और नक्काशी के लिए, तार, कील, गोंद – जोड़ने के लिए।
सजावट के लिए:
रंगीन कागज, क्रेप पेपर – लपेटने और डिजाइन के लिए, झालर, लेस, मोती, चमकी – सजावट के लिए, चांदी/सोने का वर्क, जरदोजी – रईसी वाले ताजियों में, रंग, पेंट – आकर्षक लुक के लिए, अगरबत्ती, इत्र – खुशबू के लिए।
ऊपर लगाने के लिए:
ताज – सबसे ऊपर लगाया जाने वाला मुख्य हिस्सा, चांद-तारा, कलमा शरीफ – धार्मिक निशान,
चाँद कि 7 तारीख को अलम सद्दे का जुलुस बड़े ही शान ऑ शौकत से निकलता है चाँद की 9 तारीख को कत्ल की रात होती है चाँद की 10 तारीख को ताजिए क़र्बला मे सुपुर्द ए खाक किया जाता है।
इस दौरान मदीना सबील लगाई जाती है जहाँ पर शरबत व ठंडा पानी पिलाया जाता है अखाडाबाजी मे एक से बढ़कर एक करतब दिखाया जाता है।