तेलंगाना सरकार और भू माफिया आमने-सामने

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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अपने पहले कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस ढंग से अपराधियों, विशेषकर भू-माफिया, के खिलाफ कार्यवाही की थी तथा उनकी अवैध परिसंपत्ति यों को बुलडोज़रों से धवस्त किया था, इससे नाम बुलडोज़र बाबा हो गया था। हालांकि उनके इस कदम को सुप्रीम कोर्ट ने गलत बताया था तथा नियमों का पालन करने का निर्देश दिया था फिर भी योगी ने इसमें पतली गली निकालकरअपनी “ बुलडोज़र संस्कृति” जारी रखी। उनके देखा देखी बीजेपी वाली अन्य राज्य सरकारों ने भी अपने यहाँ भी बुलडोज़र संस्कृति को अपना लिया।
दक्षिण में तेलंगाना में, जहाँ रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने राज्य की राजधानी हैदराबाद में भू माफिया को कुचलने की नीति अपनाई। लेकिन उनका तरीका योगी तथा अन्य बीजेपी राज्य सरकारों से अलग था। उन्होंने गैर कानूनी तरीके से बुलडोज़र नहीं चलाये। उन्होंने इस दिशा में कदम उठाने के लिए बकायदा कानून पर आधारित नीति अपनाई। उन्होंने एक सरकारी आदेश से शहर के लिए हैदराबाद के लिए एक ऐसा प्राधिकरण गठित किया जिसका का काम सरकारी संपत्तियों के रक्षा करना था। इसके अलावा आपातकाल में शहरवासियों को सुरक्षा प्रदान करना था। इसका गठन दो वर्ष पूर्व किया गया था। इसका अध्यक्ष एक नौकरशाह ए.वी. रंगनाथ को बनाया गया। अपने इस काम को कार्यरूप देने के लिए अलग से एक ढांचा बनाया। एक वेब साईट बनाई गई जिस पर कोई भी अवैध निर्माण के बारे में अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता था वस्तुतः जो काम हैदराबाद नगर निगम को करना चाहिए था वह काम इस प्राधिकरण को दे दिया गया . दो सालों में इस प्राधिकरण ने लगभग 3500 एकड़ भूमि को अवैध निर्माणों से मुक्त करवाया . उनकी काम को शहर के आम नागरिकों का समर्थन और सहयोग मिला। हैदराबाद शहर में अवैध निर्माणों को हाल यह था कि शहर के बीचों बीच छोटी और पुरानी झीलें गायब हो गई। वहां या तो माल बन गए या फिर इन पर भू माफिया ने आवासीय कॉलोनियां बना दी. शहर का ऐसा कोई बरसाती नाला नहीं बचा था जिस पर अवैध निर्माण ना हुआ हो .इसका असर यह हुआ कि जब भी बारिश होती शहर की सडकों और गलियों में पानी की बाढ़ आ जाती क्योंकि बारिश के पानी की कही से भी निकासी नहीं होती थी . प्राधिकरण के अध्यक्ष रंगनाथ शहर के लोंगों के लिए हीरो बन गए . उनको अपनी जिम्मेदारी निभाने में इसलिए आसानी मिली क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री रेड्डी का हाथ उनके सिर पर था . लेकिन उनके काम भू माफिया को रस नहीं आये.शहर के बड़े भवन निर्माताओं को यह समझ नहीं आ रहा था कि रंगनाथ पर लगाम कैसे कसी जाये ताकि उनके अवैध निर्माण बचे रह सकें . उन्हें कई तरह के प्रलोभन देने की कोशिश की गई लेकिन इस ईमानदार अधिकारी को खरीदने में सफल नहीं रहे . वे चाहते थे शहर में आवासीय कॉलोनियां बसाने की अनुमति देने का अधिकार नगर निगम के पास ही रहे . प्राधिकरण से नो ऑब्जेक्शन प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं हो . जब उनकी कोई चाल कामयाब नहीं हुई तो उन्होंने अदालत की ओर रुख किया . रंगनाथ के खिलाफ कई तरह के आरोप लगा कर उनको उनके पद से हटाना की मांग की गई. लम्बी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद वे अपने इस इरादे में कामयाब हुए . बताया जाता है कि इसके पीछे शहर के सबसे बड़े समझे जाने वाले भवन निर्माता की मुख्य भूमिका थी अन्य भवन निर्माताओं ने भी उनका साथ दिया . बड़ा धन एकत्रित करके महेंगे से महगे वकील किये गए। हाल ही में हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनते हुए राज्य के मुख्य सचिव को निदेश दिया कि रंगनाथ को तुरंत उनके पद से हटाया जाये तथा राज्य के किसी अन्य अधिकारी को उनके स्थान पर नियुक्त किया जाये। बताया जाता है कि मुख्यमत्री रेड्डी हाई कोर्ट के इस निर्णय से बड़े अप्रसन्न नजर आये . उनका मानना है कि रंगनाथ न केवल एक योग्य अधिकारी है बल्कि अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते है . उनको इस पद से हटाया जाना उनके साथ अन्याय होगा। ऐसा माना जाता है कि राज्य के अधिकांश बड़े अधिकारी हाई कोर्ट के इस निर्णय से हैरान हैं। कोर्ट ने रंगनाथ को हटाने की कोई अंतिम तारीख निर्धारित नहीं की है इसलिए मुख्यमंत्री रेड्डी कोई रास्ता निकालने में लगे हुए है। हो सकता है कि हाई कोर्ट के इस निर्णय को बड़ी बेंच में चुनौती दी जाये या फिर सीधे सुप्रीम कोर्ट जाया जाये। रेड्डी किसी भी कीमत पर रंगनाथ को इस पद से हटाना नहीं चाहते। (लेखक के अपने विचार है)

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