‘इलाज-बिल-मा’ से गठिया-जोड़ दर्द का इलाज

ताला के यूनानी अस्पताल में डॉ. रिजवान बोले- मिज़ाज संतुलित करना मकसद
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यूनानी चिकित्सा की प्राचीन जल चिकित्सा पद्धति ‘इलाज-बिल-मा’ अब आधुनिक बीमारियों के लिए भी कारगर विकल्प बन रही है। यूनानी चिकित्सालय ताला के प्रभारी एवं हिजामा थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. रिजवान अहमद ने बताया कि ठंडा-गर्म पानी, भाप, स्नान और जल व्यायाम के जरिए कई रोगों का उपचार संभव है।
क्या है ‘इलाज-बिल-मा’?
डॉ. रिजवान अहमद के अनुसार, यह यूनानी की प्राकृतिक उपचार पद्धति है। इसका मुख्य उद्देश्य शरीर के मिज़ाज (स्वभाव) को संतुलित करना, रक्त संचार बेहतर करना और विषैले तत्वों को बाहर निकालना है। यूनानी सिद्धांत अग्नि, जल, पृथ्वी और वायु – इन चार मूल तत्वों के संतुलन पर आधारित है। जल चिकित्सा शरीर के तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखती है।
उपचार के दो प्रमुख रूप:
पान-ए-आब (आंतरिक):
सही समय और उचित मात्रा में पानी पीना। इससे पाचन बेहतर होता है, कब्ज से राहत मिलती है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।
हम्माम (बाह्य):
भाप स्नान, गर्म-ठंडे पानी का स्नान, टब बाथ, पट्टियां और जल व्यायाम। इससे मांसपेशियों के दर्द, जोड़ों की अकड़न, गठिया, सूजन और तनाव में राहत मिलती है।
किन रोगों में सहायक:
डॉ. रिजवान ने बताया कि यह पद्धति ऑस्टियोआर्थराइटिस, फाइब्रोमायल्जिया, न्यूरोपैथी, पार्किंसंस रोग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, सेरेब्रल पाल्सी और पीरियड्स के दर्द में लाभकारी पाई गई है। विशेषज्ञों की निगरानी में गर्भावस्था के दौरान भी कुछ जटिलताओं के जोखिम को कम करने और प्रसव में आराम के लिए इसका उपयोग किया जा सकता है।
डॉ. रिजवान की सलाह:
“जल चिकित्सा का पूरा लाभ लेने के लिए संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और संयम जरूरी है। हृदय व किडनी के मरीज, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी बिना चिकित्सकीय परामर्श के हाइड्रोथेरेपी न अपनाएं।”
उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं में ‘इलाज-बिल-मा’ प्राकृतिक और सुरक्षित विकल्प के रूप में प्रभावी है। यूनानी चिकित्सालय ताला में मरीजों को इस पद्धति से उपचार दिया जा रहा है।
(डॉ. के अपने विचार हैं)

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