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जयपुर। राजस्थान हाई कोर्ट, जोधपुर में न्यायमूर्ति अनूप कुमार धण्ड की पीठ ने जैन-Z, जैन-अल्फा और जैन-बेटा मामले में एक महत्वपूर्ण एवं रिपोर्टेबल आदेश पारित करते हुए वर्तमान और भावी पीढ़ियों की शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, डिजिटल सुरक्षा, रोजगार एवं समग्र विकास से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
न्यायालय ने इस विषय को सुओ मोटू पब्लिक इंटरेस्ट लिटिजेशन के रूप में संज्ञान में लेते हुए केन्द्र एवं राज्य सरकार सहित संबंधित विभागों तथा फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) को नोटिस जारी किए हैं। न्यायालय ने विशेष रूप से सरकारी विद्यालयों, खासकर ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा एवं आधारभूत सुविधाओं की स्थिति पर ध्यानआकर्षित किया ।
न्यायालय ने कहा कि वर्तमान युग में आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, डिजिटल लर्निंग और नई तकनीकों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाना आवश्यक है, लेकिन तकनीक को बच्चों की मानवीय बुद्धिमत्ता, स्वतंत्र चिंतन, पढ़ने, लिखने और तर्क करने की क्षमता का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
जिला स्तर पर सरकारी विद्यालयों के निरीक्षण तथा जैन-Z, जैन-अल्फा और जैन-बेटा मॉनिटरिंग सेल के गठन जैसी व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही और नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया है।
हाई कोर्ट ने फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडडर्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (सेफ फ़ूड एंड बैलेंस्ड डाइट फॉर चिल्ड्रन इन स्कूल) रेगुलेशंस 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए स्कूलों में हाई फैट, सुगर एंड साल्ट (HFSS) खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक के प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
इस महत्वपूर्ण मामले में भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया भारत व्यास ने भारत सरकार एवं संबंधित रेस्पोंडेंट्स की ओर से वर्तमान पीड़ी जो भारत का भविष्य है के लिए प्रभावी पैरवी की। माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में भारत व्यास, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया, को रेस्पोंडेंट्स की ओर से उपस्थित होने के लिए विशेष रूप से अंकित किया है।
यह आदेश वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ भारत के निर्माण के लिए तैयार हो रही जैन-Z, जैन-अल्फा और जैन-बेटा पीढ़ियों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और समग्र विकास को केन्द्र में रखने वाला महत्वपूर्ण न्यायिक प्रयास माना जा रहा है। यह जानकारी एडीवी विनय कांत सक्सेना, स्टैंडिंग काउंसल भारत सरकार, राजस्थान हाई कोर्ट जयपुर ने दी।