
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल हैं हजरत सूफी बुरहान उल्ला,
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चौमू। जयपुर ग्रामीण के चौमूं कस्बे के रावण गेट, मोहल्ला नागोरियान में इस बार फिर सूफियाना रंग बिखरने वाला है। हजरत सैयदना अमीर अबुल आला के नूरे चश्म सूफी नईमुद्दीन उर्फ बरकतुल्ला शाह बंगाली बाबा के लगते जिगर, हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक सूफी मुंशी बुरहान उल्ला उर्फ अबुल उलाई इश्की बरकती दायमी इज्जती चिश्ती का 23 वां सालाना उर्स-ए-मुबारक बड़ी ही अकीदत व एहतराम के साथ मनाया जाएगा।
उर्स कमेटी के संयोजक मो. फिरोज अबुल उलाई ने बताया कि तीन दिवसीय उर्स को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं और अकीदतमंदों में भारी उत्साह है। 23 सितंबर बुधवार को कुरआन खानी और मिलादुन्नबी से उर्स का आगाज होगा। 24 सितंबर गुरुवार को दोपहर 2 बजे बाद दरगाह पर चादर पेश की जाएगी, फातेहा होगी और रात में महफिल-ए-शमा से पूरी फिजा सूफियाना हो जाएगी। 25 सितंबर शुक्रवार को कुल की रस्म व विशाल लंगर के साथ उर्स का समापन होगा। खास बात यह है कि हजरत सूफी मुंशी बुरहान उल्ला ने पूरी जिंदगी आपसी भाईचारे और प्रेम का पैगाम दिया। उनके दर पर न कोई हिंदू है न मुसलमान, सब एक हैं। यही वजह है कि उनके उर्स में हर मजहब, हर समाज के लोग दिल से शिरकत करते हैं और दुआएं मांगते हैं।