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जयपुर। प्रदेश सरकार के लिए इससे अधिक शर्मनाक स्थिति और क्या होगी कि पंचायत और निकाय चुनावों में हो रही जानबूझकर देरी पर माननीय हाईकोर्ट को यहाँ तक कहना पड़ रहा है कि ‘आयोग चुनाव नहीं करवा सकता तो बताएं, जज करवा देंगे।’ यह सरकार की घोर प्रशासनिक विफलता का प्रमाण है।
राज्य निर्वाचन आयोग का यह कथन बेहद गंभीर और चिंताजनक है कि पंचायती राज विभाग को 6 चिट्ठियाँ लिखने के बावजूद SC, ST, OBC और महिला आरक्षण संबंधी जानकारी नहीं दी गई। यह स्पष्ट दर्शाता है कि सरकार के दबाव में पंचायतीराज विभाग ने ऐसा किया और सरकार की मंशा ही चुनाव करवाने की नहीं है और वह संवैधानिक संस्थाओं को पंगु बना रही है।
राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखते हुए कहा कि माननीय न्यायालय के आदेशों की बार-बार अवहेलना करना संविधान और न्यायपालिका का सीधा अपमान है। जो सरकार न्यायपालिका का सम्मान न कर सके और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को रोके, उसे एक पल भी सत्ता में बने रहने का नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं है। लोकतंत्र के लिए यह स्थिति बेहद घातक है।
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