
राजस्थान उच्च न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
जोधपुर/जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने सज्जनगढ़ वन्यजीव अभयारण्य के इको-सेंसिटिव जोन में निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों में अपना फैसला सुनाते हुए संबंधित रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विशेष वैधानिक प्रावधानों के विपरीत सामान्य विकास कानून अथवा कथित डिमेड परमिशन के आधार पर निर्माण को वैधता प्रदान नहीं की जा सकती।
माननीय न्यायालय ने कहा कि पर्यावरणीय प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील क्षेत्रों में अनधिकृत गतिविधियों को रोकना है तथा केवल पूर्व निवेश, निर्माण की पूर्णता अथवा समय बीत जाने के आधार पर ऐसे निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता। न्यायालय ने संबंधित प्राधिकरणों द्वारा अनधिकृत निर्माण के विरुद्ध की गई सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए उन्हें कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रखने की स्वतंत्रता प्रदान की। भारत सरकार की ओर से भारत यादव, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल, भारत सरकार, ने प्रभावी पैरवी करते हुए पर्यावरणीय कानूनों एवं इको-सेंसिटिव जोन के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कानूनी पक्ष न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखे।
यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्रों में कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह जानकारी अधिवक्ता विनय कांत सक्सेना, स्टेंडिंग कॉउंसिल, जनरल ऑफ़ इंडिया ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी।