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जयपुर शहर नगर निकाय चुनाव में जिन 7 भाजपा मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया गया, उन हिंदू-मुस्लिम सम्मिलित वार्डों में भाजपा के इन प्रत्याशियों ने पार्टी की जीत के लिए दिन-रात सर्व-समाज व मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र के बीच जाकर जनसंपर्क किया और भाजपा के पक्ष में वोट मांगे। उन्हीं प्रति वार्ड में लगभग 3 से 4 हजार हिंदू परिवारों के वोट भी निर्णायक भूमिका में थे।
यह बात भाजपा पूर्व प्रदेश पदाधिकारी अ स मोर्चा एवं समाजसेवी, जयपुर के समीर मलिक ने कही। उन्होंने आगे कहा कि यदि इन वार्डों में भाजपा के प्रति निष्ठावान कार्यकर्ताओं और समर्थकों का पूरा समर्थन एवं सहयोग मिलता, तो संभव है कि हार के आंकड़े जीत में बदल जाते और कम से कम 5 मुस्लिम पार्षद भाजपा से निर्वाचित होते।
समीर मलिक ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि अब यह भी विचार का विषय है कि जिन पूर्व पार्षदों के टिकट कटे तथा कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने क्या जानबूझकर निर्दलीय अथवा विपक्षी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान कर विपक्ष को लाभ पहुंचाया? क्या केवल इसलिए कि वर्तमान प्रत्याशी मुस्लिम था?
मलिक ने कहा जबकि मुस्लिम कार्यकर्ता विपरित दिशा में भाजपा के समर्थन में पूर्ण निष्ठा से चलने के बाद भी समाज का विरोध सहता है फिर भी भाजपा को प्रथमश्रेणी में देखने की लालसा उसकी ईमानदारी पर अंकुश नहीं लगाया जा सकता ! यह एक गंभीर विषय है, जिस पर भाजपा संगठन को उच्च स्तर पर विचार-विमर्श और संवाद करना चाहिए। इस पूरे संदर्भ में आत्ममंथन की भी अति आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि वर्तमान समय में मुस्लिम समाज के एक वर्ग में भाजपा के प्रति भरोसा, समर्थन और जुड़ाव बढ़ा है। इस सकारात्मक प्रयास को आगे भी निरंतर जारी रखते हुए अधिक से अधिक मुस्लिम मतदाताओं को भाजपा की विचारधारा और विकास की राजनीति से जोड़ने का प्रयास रहेगा।