
लेखिका : लता अग्रवाल
चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)।
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हमारे देश की आबादी घनी है। अतः सरकार को चाहिए कि वह भंडारण क्षमता बढ़ाए। कोई भी वस्तु जो जनता के दैनिक जीवन से संबंधित हो। पेट्रोल, डीजल, तेल, गैस, बिजली, खाद्य सामग्री पर्याप्त भंडारण करके रखें। हमारे देश की विदेश नीति हमारी सरकार खुद तय करें। अमेरिका को हमारी विदेश नीति तय करने का कोई हक नहीं है। अगर मोदी जी अमेरिका के कहने पर इजराइल नहीं जाते तो आज देश को ऊर्जा संकट नहीं झेलना पड़ता। बेवजह भारत ने ईरान से संबंध बिगाडे और ईरान ने गैस तेल पर रोक लगा दी। धीरे-धीरे युद्ध आगे बढ़ता गया और विश्व स्तर पर देश में ऊर्जा संकट बढ़ता गया। लोग भूखे रहने पर मजबूर हो गए। ईंधन कि कमी से लोग बेरोजगार हो गए, बड़ी बड़ी कंपनिया, होटल, रेस्टोरेंट पर ताले लग गये।
इतने बड़े लोकतंत्र को संभालने के लिए सरकार को बहुत ही गंभीर होकर देश व जनहित की बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार रहना चाहिए। इस प्रकार के संकट का असर जनता पर ही पड़ता है। सांसद, विधायक पर ऐसे संकट का कोई असर नहीं पड़ेगा। दूसरी और सरकार ने शक्कर के निर्यात पर रोक लगा दी है। विश्व में चीनी के उत्पादन में भारत दूसरे नंबर पर है। सरकार का मानना है कि अगर शक्कर का भंडारण नहीं किया गया तो आने वाले समय में देश में चीनी की कीमतें बढ़ जाएगी। लेकिन सरकार ने जिस तरह से चीनी का भंडारण आने वाले समय के लिए सुरक्षित किया है उसी प्रकार अगर ऊर्जा भंडारण पर ध्यान दिया जाना चाहिए था। चीनी निर्यात पर रोक का सीधा असर हमारे विदेशी मुद्रा भंडारण पर होगा। तत्कालीन समय में देश में पर्याप्त विदेशी मुद्रा का भंडारण है। लेकिन वर्तमान में जो देश के हालात हैं हो सकता है कि हमें अतिरिक्त विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ सकती है। अतः इसके लिए भी सरकार को प्रतिबद्ध होना होगा।
जनता को तो हर हाल में सरकार के आदेश का पालन करना होगा। सरकार को नेताओं, विधायको, प्रशासन को भी पाबंद करना होगा, जनता का साथ देना होगा तभी आम आदमी सरकार पर भरोसा करके ऊर्जा संकट का सामना करेगी।
मोदी जी इस संकट में भी विदेश में घुम फिर रहे हैं और जनता को विदेश में घुमने फिरने के लिए मना करके,इस संकट में जनता का साथ देने के लिए देश में ही रहने के बजाय विदेशों में मनोरंजन कर रहे हैं।ऐसा विलक्षण प्रधानमंत्री विश्व में कहीं पर भी कभी नहीं हुआ है और न कभी होंगा। (लेखिएक के अपने विचार हैं)