
मेरी खुशी बेजुबान और बेसहारा की मुस्कान में है
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर(जयपुर)। नीली शर्ट, जींस, पैरों में जूते और हाथ में पानी की बोतल। ये कोई आम आदमी नहीं, ये हैं नदीम पठान। इनका जन्मदिन है, पर ये होटल में पार्टी नहीं मना रहे। पार्क में बैठकर अपने हाथों से मिट्टी के परिंडे में परिंदों के लिए पानी भर रहे हैं।
- 45 डिग्री में फरिश्ता बने नदीम भाई
मई की आग उगलती दोपहर। सड़क पर खड़े-खड़े इंसान का गला सूख जाए। ऐसे में नदीम पठान ने अपना जन्मदिन बेजुबानों के नाम कर दिया। पार्क में जगह – जगह मिट्टी के परिंडे लगवाए। खुद उकड़ू बैठकर बोतल से एक – एक परिंडे में साफ पानी भरा। साथ में कबूतरों के लिए ज्वार भी डाली। कबूतर दाना चुग रहे हैं, पानी पी रहे हैं और नदीम भाई को दुआएं दे रहे हैं। - गरीब की झोपड़ी तक पहुंचा तोहफा
नदीम पठान बोले कि केक काटकर खुशी मनाना आसान है। असली जश्न तब है जब किसी गरीब के घर चूल्हा जले। जन्मदिन के मौके पर उन्होंने दर्जनों जरूरतमंद परिवारों को राशन, कपड़े और नकद राशि के तोहफे दिए। ना फोटो खिंचवाई, ना मंच सजाया। चुपचाप मदद पहुंचाई। कहने लगे, ऊपर वाला सब देख रहा है। - पठान की यारी, सबसे न्यारी
कस्बे के लोग बताते हैं कि नदीम पठान का नाम ही काफी है। जिसकी मदद करने की ठान लें, उसे पूरा करके ही मानते हैं। आज जन्मदिन पर भी उन्होंने वही किया। युवाओं से अपील की कि जन्मदिन पर फिजूलखर्ची मत करो। एक परिंडा लगवा दो, एक गरीब को खाना खिला दो। यही सबसे बड़ा केक है। - सोशल मीडिया पर उमड़ा प्यार
फोटो वायरल होते ही कमेंट की बाढ़ आ गई। कोई लिख रहा है “ऐसे होते हैं पठान”, कोई बोला “भाईजान आप पर नाज है”। एक बुजुर्ग ने लिखा, “बेटा नदीम, तेरी उम्र में बरकत हो। तूने आज हमारा सिर ऊंचा कर दिया।”
नदीम पठान का जन्मदिन मंत्र - जन्मदिन पर दिखावा नहीं, सेवा करो
- बेजुबान की प्यास बुझाना सबसे बड़ा पुण्य
- गरीब की दुआ में ताकत है
- इंसानियत से बड़ा कोई मजहब नहीं