
टूटे दिल, खाली झोली, बंद किस्मत। सबका इलाज है बाबा के पास
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। चंदवाजी पुलिस थाने के सामने ऊंची डूंगरी पर विराजमान हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत कुतुबशाह रहमतुल्ला आलेह का 2 दिवसीय वार्षिक मेला 25 अप्रैल शनिवार को सुबह झंडे की रस्म के साथ मे उर्स की शुरुआत होगी तथा 26 अप्रैल रविवार को कूल की रस्म के साथ मे विधिवत सम्पन्न होगा
दरगाह के खादिम उस्मान शाह असगर शाह व निजाम शाह आदि ने बताया कि शनिवार सुबह: जब झंडा चढ़ेगा, तब बाबा की दुआ से जायरीनों की किस्मत पलटेगी।
खादिम असलम शाह ने बताया कि बाबा का झंडा कपड़े का नहीं होता। वो उन आंसुओं से बना है जो यहां आकर मोती बन गए। 25 अप्रैल शनिवार की सुबह झंडा चढ़ते ही डूंगरी जाग जाएगी। फिर जो नजारा बनेगा वो देखने का है। पगड़ी वाला जाट, टोपी वाला मियां, घूंघट वाली बाई। सब एक ही लाइन में। क्योंकि दर्द का मजहब नहीं होता।
दुकानें सजेंगी। पर असली दुकान तो बाबा की है। जहां दुआ बिकती नहीं, मिलती है।
शनिवार रात: आंसुओं की बारिश होगी
रात 9 बजे बाद मिलाद शरीफ। ना ढोल, ना बाजा। बस अल्लाह का नाम और नबी की तारीफ।
फिर शुरू होगा वो काम जिसके लिए लोग कोसों दूर से आते हैं। दुआ। हजारों लोग, हजारों दर्द, हजारों हाथ। और ऊपर से एक आवाज। मांग लो।
बुजुर्ग कहते हैं, उस रात डूंगरी पर फरिश्ते उतरते हैं। हर दुआ की पर्ची लेकर ऊपर जाते हैं।
रविवार: जब पूरा चंदवाजी बाबा के पीछे चलेगा
सुबह 7 बजे कुरान ख्वानी। फातिहा। असली रंग दोपहर 2 बजे बाद चढ़ेगा। मस्जिद के पास से गाजे बाजे के साथ चद्दर का जुलूस उठेगा।
हिन्दू भाई छतों से फूल बरसाएंगे। मुस्लिम भाई या कुतुबशाह बोलेंगे। और चद्दर जब डूंगरी चढ़ेगी तो लगेगा कि पूरी कायनात झुक गई।
शाम को चद्दर पेश होगी। कुल की रस्म होगी। और बाबा कह देंगे, जा तेरा काम हो गया।
मेले का मतलब: रोते आए, हंसते गए
बच्चों के लिए झूले लगेंगे। पर सबसे बड़ा झूला तो किस्मत का है। जो यहां आकर सीधा हो जाता है। शरबत की छबील लगेगी। पर मीठा सिर्फ घूंट में नहीं, जिंदगी में घुल जाएगा।
खुदा ने मायूसी लोगो की दुआ कबूल की
के.आर.शर्मा की गोद सूनी थी। आज बेटा स्कूल जाता है। कहते हैं, बाबा ने दिया है। एम.आर.यादव का ठेका अटका था। बाबा के बोलकर गया। शाम को फोन आ गया, ठेका आपका।
वी.पी.सैनी के उधारी के रुपए नही आरहे थे। बाबा के दर हाजिरी दी। अगला आदमी खुद घर आकर चेक दे गया, माफी भी मांगी। आर.पी.जाट को डॉक्टरों ने लाश बता दिया था। निम्स से घर ला रहे थे। रास्ते में बाबा के नाम की दुआ कराई। 15 साल से जिंदा घूम रहा हूं। बोलो, करामात नहीं तो क्या है।
इसलिए आते हैं लोग
इसलिए चंदवाजी, मनोहरपुर, शाहपुरा, जयपुर से नहीं। अलवर, भरतपुर, दिल्ली से भी गाड़ियां भरकर आती हैं।
क्योंकि ऊंची डूंगरी पर बैठा बाबा फाइल नहीं देखता। नीयत देखता है। और नीयत साफ हो तो पल में बात बन जाती है।