
इरादा हो तो ‘स्मॉग’ भी ‘ब्लू स्काई’ बनता है
लेखक : रामगोपाल बिश्नोई
पर्यावरण संघर्ष समिति, बीकानेर के संयोजक और जाने-माने पर्यावरण कार्यकर्ता हैं।
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2013 में दुनिया हंसती थी – “चीन = गैस चैंबर”। बीजिंग की हवा में PM2.5 101.7 µg/m³ था, दिल्ली से भी दोगुना जहरीला। बच्चों के बस्ते में किताब से पहले मास्क जाता था। दुनिया ने नाम दिया: ‘Airpocalypse’।2024 में दुनिया हैरान हो गयी – उसी बीजिंग की हवा में PM2.5 30.9 µg/m³ है। 10 साल, 70 फीसदी की गिरावट। ‘ब्लू स्काई डेज’ साल में 300 दिन। चीन की राजधानी अब भारत की राजधानी से तीन गुना साफ है। और भारत? 2013 में दिल्ली PM2.5 153 µg/m³ – चीन से गंदी। 2024 में दिल्ली 100-120 µg/m³ – सुधरी नहीं। बीकानेर 2013 में 65 µg/m³ था, आज 100 पार। दुनिया के 20 सबसे गंदे शहरों में 14 हमारे, चीन का एक भी नहीं।
सवाल सीधा है: 141 करोड़ वाले चीन ने कैसे किया, 142 करोड़ वाला भारत क्यों नहीं कर पाया? जवाब भी सीधा है – नीयत का फर्क। चीन का फॉर्मूला – ‘डंडा + हरियाली ‘2013 में चीन ने ‘Air Pollution Action Plan’ लागू किया। 5 सख्त कदम:–
- कानून का डंडा: पर्यावरण कानून बदला। जुर्माना 1 लाख से सीधा 1 करोड़। फैक्ट्री सील, मालिक जेल। भारत में आज भी जुर्माना 5000 – फैक्ट्री मालिक चाय पिलाकर निकल जाता है।
- कोयले पर ताला: बीजिंग में 2013-2018 तक सभी कोयला बिजली घर बंद। घर-घर पाइप गैस। भारत में 10 प्लांट भी बंद नहीं कर पाए, उल्टा और नए खुल रहे।
- हरा पर्दा : सम्राट अशोक की तरह सड़क किनारे बरगद-आम की जगह ‘ग्रीन बेल्ट’। 2013-2023 में 35 करोड़ हेक्टेयर जंगल बढ़ाया। भारत में 10 साल में सिर्फ 1.5 करोड़ – वो भी कागज पर।
- कुर्सी का खतरा : जो मेयर PM2.5 टारगेट फेल करे, उसकी फंडिंग कट, नौकरी खतरे में। हमारे यहां AQI 500 पार हो जाए, मेयर को प्रमोशन मिल जाए।
- जनता की आंख : AQI ऐप हर फोन में। फैक्ट्री धुआं छोड़े, फोटो खींचो, 1 घंटे में कार्रवाई। हमारे यहां सेंसर लगे हैं पर चालू नहीं।
नतीजा : चीन में भारी प्रदूषण वाले दिन 2013 में 88 → 2019 में 20। PM2.5 आधा । भारत का फॉर्मूला – ‘बहाना + कटाई’। - कानून कागजी : NGT बोले ‘पेड़ मत काटो’, सरकार बोले ‘विकास जरूरी’।
- विकास vs विनाश : बीकानेर में ‘सोलर’ के नाम पर 1.22 लाख खेजड़ी काटने का प्लान। यानी ऑक्सीजन की फैक्ट्री बंद कर इलेक्ट्रिक की फैक्ट्री खोलेंगे।
- हरियाली कम : यूरोप कहता है 30% पेड़ कवर = 12% मौतें कम। हम 1.22 लाख पेड़ काटकर मौत बुला रहे।
- जवाबदेही जीरो : दिल्ली में CJI चंद्रचूड़ बोले “मैं घूम नहीं सकता”, फिर भी दिवाली पर पटाखे। सरकार चुप। नतीजा : बीजिंग में CJI घूम सकता है, दिल्ली में नहीं।
भारत का सबक – ‘अशोक से एयरपोकलिप्स’ तक । 2300 साल पहले सम्राट अशोक ने शिलालेख में लिखवाया: सड़कों पर बरगद लगाओ ताकि पशु-मनुष्य को छाया मिले। हर 8 कोस पर कुआं खुदवाओ।” तब न CO2 था, न क्लाइमेट क्राइसिस। फिर भी राजा का धर्म = पेड़ लगाना था। आज क्लाइमेट क्राइसिस है, राष्ट्रपति बोल रहीं हैं। “दुष्प्रभाव सब भुगत रहे”, CJI बोल रहे “सांस फूलती है”, फिर भी हम 1.22 लाख खेजड़ी कटवा रहे। ये धर्म नहीं, कलंक है।
चीन ने 141 करोड़ को साफ हवा दी। हम 142 करोड़ को भी नहीं दे पा रहे। फर्क नीति का नहीं, नीयत का है। रास्ता क्या है – ‘चीन मॉडल + थार डॉक्ट्रिन’*। - धारा 212 का डंडा। पेड़ कटे तो BNS 325 में जेल। चीन की तरह जुर्माना 1 लाख प्रति पेड़।
- ग्रीन क्रेडिट का गाजर : 500 रु प्रति पेड़ सालाना। 1.22 लाख पेड़ = 6.1 करोड़ किसान की जेब में।
- अशोक की राह: हर सड़क, हर खेत की मेड़ पर खेजड़ी। ‘ब्लू स्काई’ सरकारी योजना नहीं, जनता का धर्म बने।
- मेयर की परीक्षा : PM2.5 बढ़ा तो फंडिंग कट, कुर्सी गई।
1730 में खेजड़ली में 363 लोग पेड़ के लिए कट गए थे। 2026 में हमें कटना नहीं, डटना है। JCB के आगे ‘अमृता ब्रिगेड’ खड़ी हो जाए – माताएं थाली लेकर। ड्राइवर से पूछें: “पहले मेरे सिर पर चलाओ, फिर पेड़ पर”। क्योंकि इतिहास गवाह है – वेद ने मना किया, अशोक ने लगाया, चीन ने बचाया। सिर्फ हम काटने पर तुले हैं।
अब तय कर लो: बीजिंग बनना है या भोपाल गैस चैंबर ?
JCB बंद, खेजड़ी चालू – यही ‘विकसित भारत’ का पहला कदम होगा।
(लेखक का अपना अध्ययन एवं अपने विचार हैं)