सेवा बड़ी, सम्मान बाद में – अब्दुल अज़ीज़ लोहानी की सादगी की मिसाल

जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। अब्दुल अज़ीज़ लोहानी की जन्मदिन पर सेवा वाली पहल के बाद एक और दिल छू लेने वाला किस्सा सामने आया है।
लाइनमैन तेजाराम जाट खोरा, अब्दुल अज़ीज़ लोहानी की सादगी और समाजसेवा से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उनके जन्मदिन (5 जुलाई 2026) पर सवामणी का आयोजन करना चाहा। उनका इरादा था कि लोहानी जी को साफा बांधकर, माला पहनाकर पूरे मान-सम्मान के साथ स्वागत किया जाए।
लेकिन हुआ क्या?
जब तेजाराम जाट ने लोहानी को सम्मान के लिए बुलाने का निमंत्रण दिया , तो लोहानी ने हाथ जोड़कर मना कर दिया।
लोहानी ने कहा “तेजाराम भाई, आपका प्रेम और आदर मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान है। लेकिन 5 जुलाई का दिन सेवा का है, दिखावे का नहीं। साफा-माला की जगह किसी गरीब का पेट भर दो, गौशाला में चारा डाल दो। यही मेरे लिए सबसे बड़ी सवामणी होगी।”
तेजाराम जाट बोले:
“ऐसे लोग बहुत कम होते हैं जो सम्मान को भी ठुकरा दें। लोहानी की सादगी ने मेरा सिर झुका दिया।”
सीख :- आज के जमाने में जहाँ लोग छोटी-सी बात पर फोटो खिंचवाते हैं, वहीं अब्दुल अज़ीज़ लोहानी ने सम्मान को भी विनम्रता से टाल दिया। उनकी ये सोच साबित करती है कि असली बड़े वो हैं जो बड़े बनने से इनकार कर दें।

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