
बुर्रहान बाबा की दुआ से संवर जाता है मुकद्दर – आबिद अली चिश्ती
जाफर लोहानी
www.daylifenews.in
मनोहरपुर (जयपुर)। निकटवर्ती ग्राम ताला में स्थित हिन्दू-मुस्लिम एकता के प्रतीक हजरत बुर्रहान बाबा रहमतुल्लाह अलैह का दो दिवसीय वार्षिक उर्स बड़े ही अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। उर्स के मौके पर दूर-दराज से आए सैकड़ों जायरीनों का सैलाब उमड़ पड़ा और पूरी दरगाह परिसर या बुर्रहान हक बुर्रहान” की सदाओं से गूंज उठा।
उर्स में शिरकत करते हुए हजरत ख्वाजा सैयद शाह अहमद चिश्ती (रह.) के सज्जादानशीन व सूफी खानकाह एसोसिएशन के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष हजरत सैयद आबिद अली चिश्ती फरीदी फाखरी ने जायरीनों को संबोधित करते हुए कहा कि “बुर्रहान बाबा की दुआ से मुकद्दर संवर जाता है।”
उन्होंने कहा कि हजरत बुर्रहान बाबा ने वर्षों पूर्व इस घने जंगल के एकांत में बैठकर कठोर चिल्लाकशी और इबादत की थी। अल्लाह ने उन्हें ऐसी करामाती ताकत अता की थी कि उनकी दुआ से कई लाइलाज लोगों को शिफा मिली, कई बिगड़े काम बने। उनकी करामात छुप न सकी और देखते ही देखते उनकी शोहरत पूरे जगत में फैल गई, जिसके बाद हिन्दू-मुस्लिम सभी धर्मों के लोग उनके मुरीद बन गए। आज भी जो सच्चे दिल से उनकी चौखट पर आता है, उसकी मुराद जरूर पूरी होती है।
इस पाक मौके पर दरगाह कमेटी की जानिब से एक दस्तारबंदी प्रोग्राम भी रखा गया, जिसमें सूफी विचारधारा को आगे बढ़ाने वाले कई खादिमों को सम्मानित किया गया।
पूर्व सरपंच एफ डी खान ने आबिद अली चिश्ती कि दस्तार बंदी की। दस्तारबंदी में मोहम्मद अमीन खान साबरी, समाजसेवी वसीम राजा साहब (जयपुर), फहीम खान फरीदी (जयपुर), शफीक बाबा (जयपुर), महबूब मनिहार (धानोता), रोशन मनिहार (रडावास), मजीद खान उस्ताद (अमरसर), कम्मो चाचा, सलीम कुरैशी, मुस्तफा कुरैशी, रिजवान खान, फारूक काजी, सैयद सादिक अली चिश्ती सहित तमाम साथियों की दस्तारबंदी कर उन्हें सूफी मिशन से जुड़ने की जिम्मेदारी दी गई। अंत में मुल्क में अमन-चैन, भाईचारे और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई।