
लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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दक्षिण के तेलंगाना राज्य , जहाँ कांग्रेस पार्टी की सरकार है , में चल रहे विशेष गहन मतदाता पुनरीक्षण में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम काटे जाने से राज्य कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है . इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री रेवन्ना रेड्डी तथा कांग्रेस पार्टी के प्रदेश नेताओं के बीच ठन गई है .दोनों एक दूसरे पर आरोप और प्रत्यारोप लगाने में कोई कमी नहीं रख रहे है. दोनों इसके लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं।
गहन मतदाता पुनरीक्षण प्रक्रिया का प्रथम चरण पूरा हो जाने के बाद जो आंकड़े सामने आये हैं उसके अनुसार पुरानी मतदाता सूची में से लगभग 21 प्रतिशत मतदातायों के नाम कट गए है . पुरानी सूची के अनुसार राज्य में 3,38 26, 448 मतदाता थे . अब जारी हुई प्रारंभिक सूची में कुल 2,64,86214 मतदाता है यानि के राज्य में मतदातायों के संख्या लगभग 73 लाख घट गई है . चुनाव आयोग अनुसार मतदातायों कि दिए गए विवरण दिए जाने वाले फार्म अपने इलाके के बी एल ओ को भर कर नहीं दिए है . आयोग के अनुसार सर्वेक्षण के अनुसार इनमे वे मतदाता शामिल है जो या तो मृत हो चुके या फिर राज्य से चले गए है . इसमें वे नाम मतदाता शामिल है जिनके नाम दिए गए पाए गए है . बड़े स्तर पर कई मतदातायों के नाम दो स्थानों की सूचियों में पाए गए है।
मुख्यमंत्री रेवन्ना रेड्डी इस तरह नाम काटे जाने से संतुष्ट नहीं है . इसके लिए वे चुनाव आयोग के साथ अपनी ही पार्टी के नेताओं को भी दोषी ठहरा रहे है . उनका कहना है नियमों के अनुसार ब्लाक लेवल अधिकारियों को घर घर जाकर मतदातायों के विवरण से भरे हुये फॉर्म लेने के जाना चाहिए था . उन्होंने यह काम ईमानदारी से नहीं किया तथा वे इस बात का इन्तज़ार करते रहे कि मातडाता खुद आ कर अपने फार्म मतदाता केंद्र पर लेकर आयेगा।
रेवंत रेड्डी ने अपने पार्टी के, अधिकारियों म नेताओं और जमीनी कार्य कार्यकर्ताओं को कोताही बरतने का दोषी ठहराया है। उन्होंने कहा कि राज्य पार्टी के अधिकारियों बड़ी संख्या में अपने पोलिंग एजेंट ही नियुक्त नहीं किये . जिनको नियुक्त किया उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई। इन पोलिंग एजेंटों को यह निदेश दिया गया था कि वे अपने इलाके के मतदातायों से सीधा संपर्क कर इस बत को सुनिश्चित करना था कि उनका फॉर्म अधिकारियों के पास पहुच गया है . इसकी वजह से कई स्थानों पर कांग्रेस समर्थक मतदाता भी अपने फॉर्म जमा नहीं करवा पाए। इसके विपरीत विपक्षी दल, बीजेपी और भारत राष्ट्र समिति के सदस्य , इस मामले में काफी आगे रहे . उन्होंने इस बात को पक्का किया कि उनके समर्थकों सहित इलाके के अन्य मतदाता समय से पहले ही अपने फॉर्म मतदाता केंद्र में जमा करवा दें . उन्होंने मतदाताओं को फॉर्म में विवरण भरने में भी सहायता की।
रेड्डी का आरोप है कि चुनाव आयोग से जुड़े से अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल तथा असम की तरह मुस्लिम , गरीब और पिछड़े वर्ग के मतदातायों के नाम किसी ने किसी कारण तथा योजनाबद्ध तरीके से काट दिए . इस तरह मतदाता सूची से नाम कटने से सही मतदाता भी सरकार की लाभकारी योजनायें का लाभ पाने से वंचित रह जायेगा।
आयोग का कहना है कि सारा गहन पुनरीक्षण नियमों के अनुसार किया गया है .अगर किसी को अपना नाम कटे जाने पर ऐतराज है वे दूसरे चरण में सभी वांछित दस्तावेज पेश कर अपना नाम मतदाता सूची में शामिल करने का दावा पेश कर सकते हैं . आयोग ने इस बात को सुनिश्चित किया है किसी भी सही मतदाता का नाम सूची से नहीं कटे।
अधिकारियों का मानना है कि पिछले कई सालों से आबादी का पलायन एक स्थान से दूसरे स्थान पर हो गया है। राज्य की राजधानी हैदराबाद की आबादी में तेजी से वृद्धि हुई है। आस पास के जिलों के लोग बड़ी संख्या में हैदराबाद आकर बस गए है। इमें से बहुत से लोगों ने अपने वोट दोनों स्थान पर बना रखे है। इस प्रकार उनके मत दो जगह बने हुए है . ऐसे नामों की जंचा पड़ताल करके उनके नाम प्रारंभिक मतदाता सूची में शामिल नहों किये गए है . हैदराबाद आकर बसे बहुत से लोगों ने राजधानी में बस जाने के बाद भी अपने नाम गाँव की मतदाता सूची में रखे हुए है इसलिए उनको नामों को हैदराबाद की मतदाता सूची में शामिल नहों किया गया।
विवरण के अनुसार 45 लाख मतदाता स्थाई तौर पर अपने मूल स्थान से कहीं और जाकर बस गए है . दस लाख मतदातायों की इस दौरान मृत्यु हो गई है तथा लगभग 12 लाख अपने दिए पते पर नहीं रह रहे हैं। (लेखक के अपने विचार हैं)