कर्नाटक के मंत्री का दूसरी बार इस्तीफ़ा

लेखक : लोकपाल सेठी
वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक
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लगभग एक महीने की सियासी जोड़ तोड़ के बाद कर्नाटक के योजना और सांख्यिकी मंत्री बी. नागेन्द्र को आखिरकार मंत्री मंडल से इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। दो साल की अवधि में यह दूसरा मौका था जब उन्हें कांग्रेस पार्टी आला कमान ने तुरंत इस्तीफ़ा देने के निदेश दिया, हालाँकि पिछले एक महीने से यह कयास लगाया जा रहा था को उन्हें अपने पद से इस्तीफ़ा देने के लिए कहा जायेगा या नहीं. वे खुद भी एक से अधिक बार कह चुके थे कि फिलहाल उनके इस्तीफ़ा देने की कोई बात नहीं है।
लगभग दो साल पहले कर्नाटक महर्षि बाल्मीकि अनुसूचित जन जाति विकास निगम में लगभग 89 करोड़ रूपये का घोटाला समाने आया था। उस समय नागेन्द्र अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जन जाति विभाग के मंत्री थे। वे खुद भी अनुसूचित जाति से आते है तत्कालीन मुख्यमंत्री सिध्हरामिया ने सारे मामले को पार्टी की आला कमान के सामने रखा तथा आला कमान ने उन्हें तुरंत इस्तीफ़ा देने को कहा. हालाँकि नागेन्द्र ने बार बार कहा कि उनका इस घोटले से कोई सम्बन्ध नहीं है तथा उनके विरोधी उनके ऊपर झूटे आरोपों लगा रहे है।
यह मामला दबा ही रह जाता है ,लेकिन जब निगम के लेखा विभाग के एक अधिकारी चंद्रशेखर ने आत्म हटाया न की होती . आत्महत्या से पूर्व उन्होंने एक विस्तृत पत्र लिखा था जिसमें समे उन्होंने इस घोटाले का उल्लेख किया था। उन्होंने यह आरोप लगाया था कि विभाग के मंत्री के रूप नागेन्द्र ने उनको मौखिक आदेश दिया था कि वे 89 करोड़ रुपये की राशि लगभग एक दर्जन खातों में स्थानांतरित कर दे . ये सब खाते हैदराबाद के अलग अलग बैंको में थे . चन्द्शेखर को यह भय सता रहा था कि जिस दिन यह घोटला उजागर हुआ इसके लिए सारे आरोप उनपर ही जायेंगे तथा उन्हें इस घोटाला का मास्टर माईंड बना दिया जायेगा . इस पत्र के समाने आते ही राजनीतिक बवाल शुरू हो गया . यहाँ तक कहा गया कि इसके पीछे राज्य के मुख्यमंत्री का भी हाथ हैक्योंकि उनकी जानकारी के बिना इतनी बड़ी राशि निजी खातों में कैसे स्थानातरित कर दी गई . निगम का खाता एक सरकारी बैंक की बेंगलुरु शाखा में था , इसलिए इस बैंक के उच्च अधिकारी सतर्क हो गए . जाँच की गई तथा इसमें बैंक की शाखा के दो अधिकारियों को लिप्त पाया गया . उनका तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया . बैंक ने अपनी ओर से मामला सी बी आई को जाँच के लिए सौंप दिया . इसके बाद मुख्यमंत्री तथा पार्टी अला कमान के पास कोई चारा नहीं था इसलिए नागेन्द्र के तुरंत को इस्तीफ़ा देने के लिए कहा।
· कुछ हफ्ते पूर्व जब राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हुआ तथा उप मुख्यमंत्री डी . के , शिवकुमार राज्य के नए मुख्यमंत्री बने तो नागेन्द्र को इस बार कैबिनेट मंत्री बनाया गया तथा उन्हें योजना विभाग के साथ सांख्यिकी विभाग भी दिया गया . इसी बीच सी बी आई ने अपने जाँच जारी रखी . कई लोगो लोंगों के खिलाफ मामले दर्ज किये गए . पिछले महीने के शुरू में सी बी आई ने राज्य के राज्यपाल थेवरचंद गहलोत को पत्र लिख कर नागेन्द्र के खिलाफ इस घोटाले में लिप्तता के लिए मामला चलाने के अनुमित मांगी . नियमों और प्रक्रिया के अनुसार राज्यपाल ने सरकार के गृह बिभाग को पत्र लिख कर इस मामले की तफसील तथा तथ्यों की जानकारी देने के लिए कहा ताकि वे इस बारे में निर्णय कर सके . यह बात सामने आते ही राज्य के प्रमुख विपक्षी ताकि बीजेपी ने इस एक बड़ा मुददा बना लिया . उस समय राज्य विधान मंडल का सत्र चल रहा था . बीजेपी तथा उसके सहयोगी दल जनता दल (एस ) ने मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर कई दिन सदन की कार्यवाही नहीं चलने दी. पार्टी नेताओं ने घोषणा की कि अगर नागेन्द्र ने 1 सितम्बर से राज्य के विभिन्न इलाकों में पदयात्रायों का आयोजन करेगी।
· मामले की गंभीरता को देखते मुख्यमंत्री ने अगस्त के आखिरी हफ्ते दिली जा कर पार्टी अध्यक्ष मलिकार्जुन खरगे से सहित अन्य नेताओं से मिले . आखिर में यह तय हुआ कि इससे पहले बीजेपी इस बड़ा मुद्ददा मुद्दा बनाये , नागेन्द्र को इस्तीफ़ा देने के लिए कहा जाये।
· इस्तीफ़ा देने से पहले नागेन्द्र ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने स्वेच्छा से इस्तीफ दिया है उनपर किसी तरह का दवाब नहीं था . उन्होंने आरोप लगाया कि मनु स्मृति की सोच वाले तत्वों ने उनके खिलाफ अभियान है चलाया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते।
· इसके साथ ही राज्यमंत्रिमंडल में दो स्थान रिक्त हो गए हैं . हाल के मंत्रिमंडल विस्तार में एक पद खाली रखा गया था . कई दशकों के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्य मंत्रिमंडल में किसी महिला को शामिल नहीं गया . अब इन पदों भरने की सियासी मशकत शुरू होगी. यह कब तक चलेगी इसके बार में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। (लेखक के अपने विचार हैं)

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