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जयपुर। जिला उपभोक्ता आयोग, जयपुर-चतुर्थ ने पूरा होम लोन चुकाने के बाद भी मकान के मूल दस्तावेज वापस नहीं लौटाने और उनके गुम होने के मामले में LICHFL को सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने कंपनी को परिवादी को 2 लाख 50 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने तथा एक माह के भीतर मकान के दस्तावेज अपने खर्चे पर तैयार कराकर सौंपने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार शर्मा तथा सदस्य नीलम शर्मा और पूजा मित्तल ने यह आदेश दिल्ली निवासी रविन्द्र नाथ द्वारा दायर परिवाद पर सुनाया। मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता जगमोहन पारीक ने पक्ष रखा।
परिवाद में बताया गया कि रविन्द्र नाथ ने LICHFL से होम लोन लिया था, जिसके बदले कंपनी के पास मकान के मूल कागजात जमा कराए गए थे। निर्धारित अवधि में ऋण की समस्त राशि चुका देने के बाद परिवादी ने कंपनी से अपने मूल दस्तावेज लौटाने की मांग की। आरोप है कि बार-बार अनुरोध के बावजूद कंपनी ने दस्तावेज वापस नहीं किए।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कंपनी मूल कागजात उपलब्ध कराने में असफल रही। आयोग ने माना कि ऋण की पूरी राशि प्राप्त होने के बाद वित्तीय संस्था का दायित्व था कि वह ग्राहक के दस्तावेज सुरक्षित रखे और समय पर वापस करे। ऐसा नहीं करना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि मूल संपत्ति दस्तावेजों के अभाव में उपभोक्ता को आर्थिक, मानसिक और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में वित्तीय संस्था की लापरवाही उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।
आदेश के अनुसार, LICHFL को एक माह के भीतर परिवादी को 2.5 लाख रुपये हर्जाना अदा करना होगा। साथ ही मकान के दस्तावेज संबंधित विभागों से पुनः तैयार कराकर अपने खर्चे पर परिवादी को उपलब्ध कराने होंगे।
निर्धारित अवधि में आदेश की पालना नहीं होने पर परिवादी को विधिक प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई का अधिकार रहेगा।