बांदा जनपद में जल संरक्षण के अनूठे प्रयास – रामबाबू तिवारी

लेखक : रामबाबू तिवारी, पर्यावरणविद्
लेखक वाटर हीरो के सम्मान से सम्मानित हैं।
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बुंदेलखंड क्षेत्र, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के सात और मध्य प्रदेश के सात जिलों में फैला है, लंबे समय से जल संकट की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। प्रत्येक वर्ष सूखा अतिथि की तरह आता है। इस क्षेत्र में औसत वर्षा अपेक्षाकृत कम होती है और वर्षा का वितरण भी असमान रहता है। अधिकांश वर्षा का पानी उचित जल संचयन व्यवस्था के अभाव में बहकर निकल जाता है। जल संकट के कारण यहां कृषि उत्पादन प्रभावित होता है, पेयजल की समस्या बढ़ती है, पशुधन पर संकट आता है तथा लोगों को रोजगार की तलाश में पलायन करना पड़ता है। इस वर्ष बुन्देलखण्ड के बांदा का तापमान विश्व के सबसे अधिकतम तापमान वाला शहर रहा है। भीषण गर्मी और पानी की कमी से जूझने वाले उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के बांदा जनपद में जल संरक्षण के लिए अनूठे प्रयास किए जा रहे हैं। यहां जल संचयन के लिए पानी की पाठशाला, पानी चौपाल, पानी पंचायत लगाकर तालाबों की साफ-सफाई, श्रम साधना के साथ तालाबों की डिसिल्टिंग कर तालाबों का जीर्णोद्धार कराना अहम है। इस नमूने में जल सेवकों का गठन और जल संचयन हेतु एक कैडर खड़ा करना बड़ा कामहै। प्रायोगिक तौर पर यहां खेतों में बरसात के पानी के संग्रहण की दिशा में भी काम किया जा रहा है। जिले के बबेरू ब्लॉक में पड़ने वाले गांव अंधाव में ‘खेत का पानी खेत में- गांव का पानी गांव में’ अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए नया प्रयोग शुरू किया गया है। बरसात की एक-एक बूंद को सहजने के लिए खेत का पानी खेत में रोकने हेतु खेतों पर मेड़बंदी कराई जा रही है। खेत में मेड बनाकर आगामी बरसात के जल को रोका जाएगा जिससे खेतो में नमी आयेगी, हरियाली बढ़ेगी और गांव का भूजल का स्तर बढ़ेगा। वही गांव के देवन तालाब, झलिया, बजरंग सागर तालाबों का पुनरुद्धार सामुदायिक सहयोग से कराया गया है। इस गांव में श्रम साधना और श्रम दान को लोग पुण्य की डुबकी लगाना मानते हैं। प्रत्येक घर से एक हाँथ इस पुण्य की डुबकी (श्रम दान ) में जरूर जाता है। गांव में तालाब के पुनरुद्धार के उपरांत तालाब को वाटर बैंक का नाम देते हैं।
तालाब की प्रबंध समिति बना कर तालाब के जल का उपयोग किस प्रकार से होगा, तालाब प्रबंध समिति तय करती है। इस अभियान से जुड़े हुए किसानों का कहना है कि किसान अपने लागत से ट्रैक्टर के माध्यम से बरसात की एक-एक बूंद को सहजने के लिए खेतों में मेडबंदी करवा रहे है। अंधाव के अलावा ग्राम पंचायत भभूवा , पिंडारण के किसान भी मेडबन्दी करवा रहे है। किसान सत्य नारायण, स्वतंत्र यादव, कामता यादव, राजा भैया जैसे दर्जनों किसानों ने अपने खेत 10 बीघे से अधिक में मेडबंदी करवाई है। पूर्व के वर्षों में भी किसान ने अपने खेत में मेडबंदी करवाई है। उनके खेत के मेड में पेड़ भी लगाये गये हैं। वे तैयार भी हो रहे है। बरसात की एक-एक बूंद को मेड़बंदी से खेत में रोक जा रहा है। गांव में जल संचयन हेतु गांव के लोगों को जल के स्रोत तालाबों से जोड़ने हेतु प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा में “तालाब महोत्सव” का आयोजन भी किया जाता है। इस तालाब महोत्सव में तालाब के किनारे तालाब को बचाने हेतु शपथ भी ली जाती है,कि तालाब को स्वच्छ और निर्मल करेंगे और तालाब नहीं यह सागर है। तालाब के किनारे मानव श्रृंखला का आयोजन किया जाता है, तालाब की निर्मलता हेतु हम सब गांव वासी एक हैं। तालाब का पूजन कर तालाब का शुक्रिया अदा करते है। तालाब के किनारे अनेक गतिविधियां व आयोजन किए जाते है जैसे- विराट दंगल,आल्हा गीत, लोक गीत, लोक नृत्य, मेला उत्सव ,खेल, रामचरित मानस का पाठ आदि- आदि।
गांव की समृद्धि और तरक्की का प्रतीक है तालाब। तालाब है तो गांव है, तालाब है तो खेती है। इस गांव में एक एक बच्चा जल संचयन के गुड जानता है। पानी की एक भी बूंद की बर्बादी नहीं होती है। यहां जल साक्षरता का दर अधिक है। गांव के लोग अपना वाटर बजट निकालते है। बुंदेलखंड क्षेत्र के सूखाग्रस्त बांदा जनपद जहां हाल ही इस वर्ष विश्व का सबसे अधिकतम तापमान रहा ।
वैसे बांदा जनपद का यह गांव अंधाव एक जल संचयन का मॉडल बन गया है। इस गांव में जल संचयन के हो रहे प्रयासों की सराहना भारत के प्रधानमंत्री अपने “मन की बात” रेडियो कार्यक्रम में 27 जून 2021 को कर चुके हैं। (लेखक के अपने विचार हैं)

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