
जाफर लोहानी
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मनोहरपुर (जयपुर)। हिंदू-मुस्लिम एकता के प्रतीक दरगाह हजरत अल मशरूफ मारूफ सैय्यद जुल्फिकार अली शाह साहब रह. (घाटी वाले बाबा), आमेर, जयपुर का सालाना उर्स मुबारक हमेशा की तरह इस साल भी बड़ी अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है।
दरगाह के मुतवल्ली व सज्जादा नशीन मो. यूनुस खान चिश्ती और नायब मुतवल्ली मसनद नशीन मो. सरफराज चिश्ती साबरी ने बताया कि उर्स में शामिल होने के लिए तमाम सूफी इकराम व हर ख़ासो आम को दावत दी जाती है कि इस उर्स में शिरकत फरमाकर सवाबे दारेन हासिल करें।
उन्होंने बताया कि बतारीख 17 रबीउलअव्वल 1448 हि. मुताबिक 31 अगस्त 2026 बरोज़ सोमवार की रात इशा बाद मीलाद शरीफ होंगी। इसी प्रकार बतारीख 18 रबीउलअव्वल 1448 हि. मुताबिक 1 सितंबर 2026 बरोज़ मंगलवार की रात इशा बाद चादर पेश की जायेगी व महफिले समां होंगी।
इसी प्रकार बतारीख 19 रबीउलअव्वल 1448 हि. मुताबिक 2 सितंबर 2026 बरोज़ बुधवार फजर नमाज़ के बाद कुरान ख्वानी होंगी। इसी प्रकार 2 सितंबर 2026 बरोज़ बुधवार सुबह 10 बजे फातहा कुल की रस्म व लंगर होगा। उन्होंने बताया कि यह उर्स दरगाह हजरत सैय्यद जुल्फिकार अली शाह साहब रह., घाटी वाले बाबा, आमेर, जयपुर में भरेगा। बताया गया कि इस दरगाह पर हर मजहब के लोग आकर अपनी मुरादें मांगते हैं और यह दरगाह हमेशा से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल रही है।