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कर्नाटक। एसीसी, अदाणी फाउंडेशन के साथ मिलकर थोंडेभवी और उसके आसपास के क्षेत्रों में समुदाय-केंद्रित विकास पहलों के माध्यम से किसानों को टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने और उनकी आजीविका को अधिक सुरक्षित बनाने में सहयोग कर रहा है। तपसमकनहल्ली गांव के किसान हरीश के लिए खेती करना लगातार कठिन होता जा रहा था। एक अधिक टिकाऊ विकल्प की तलाश में हरीश ने अदाणी फाउंडेशन द्वारा समर्थित सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों की खेती को बढ़ावा देने वाली पहल में भाग लिया। इस कार्यक्रम के तहत किसानों को खेती की तकनीकों, संभावित आय और बाजार के अवसरों के बारे में प्रशिक्षण और जानकारी दी गई। आज हरीश ने अपने खेत में लगभग 7,000 सहजन के पौधे लगाए हैं और पूरी तरह सहजन की पत्तियों की खेती अपना ली है। अनुमान है कि उनका वार्षिक उत्पादन लगभग 2,240 किलोग्राम होगा, जिससे करीब 2.24 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होगा। खेती की कुल लागत केवल लगभग 26,000 रुपये रहने का अनुमान है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें लगभग 1.98 लाख रुपये की वार्षिक शुद्ध आय होगी। साथ ही यह फसल लगभग 15 वर्षों तक उत्पादक बनी रह सकती है।